Monday, May 29, 2017

मिरर इमेज लिखने के शोक ने लिखवाई विश्व प्रसिद्ध पुस्तकें ( Writing of a mirror image is written by world famous books)




लेखक पीयूष गोयल
दुनिया में एक से एक कलाकार मौजूद है जिनकी प्रतिभा देखकर लोग चमत्कार समझने लगते है। ऐसे ही एक कलाकार ने पांच तरह की पुस्तकों को लिखकर चौका दिया है। लेखक पीयूष गोयल ने उल्टे अक्षरों में गीता, सुई से मधुशाला, मेंहंदी से गीतांजलि, कार्बन पेपर से पंचतंत्र के साथ ही कील से पीयूष वाणी लिख डाली। पीयूष की इन किताबों को देखकर हर कोई हतप्रभ है। कला और दक्षता की कोई सीमा नहीं होती,रोज नई उपलब्‍धियां प्रकाश में आती रहती हैं, ऐसा ही दिलचस्‍प कारनामा किया है श्रीमती रविकांता एवं डॉ. दवेंद्र कुमार गोयल के बेटे पीयूष गोयल ने। उसने पंच प्रचलित पुस्‍तकें पंच तरीके से लिख डाली हैं।
इनमें अध्‍यात्‍म दर्शन और कर्मफल संस्‍कृति को व्‍यापक और सहजता के साथ जनग्राही बनाने वाली भागवत गीता भी शामिल है।49 वर्षीय पीयूष गोयल अपने धुन में रमकर कुछ अलग करने में जुटे कि शब्दों को उल्टा लिखने में लग गए। इस धुन में ऐसे रमे कि कई अलग-अलग सामग्री से कई पुस्तकें लिख दीं।

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग का पढ़ाई करने वाले पीयूष गोयल का 2000 में एक्सीडेंट हो गया था। उन्हें इस हादसे से उबरने में करीब नौ माह  लग गए।  इस दौरान उन्होंने श्रीमद्भभगवद गीता को अपने जीवन में उतार लिया। जब वे ठीक हुए तो कुछ अलग करने की जिजीविषा पाले वे शब्दों को उल्टा (मिरर शैली) लिखने का प्रयास करने लगे। फिर अभ्यास ऐसा बना कि उन्होंने कई किताबें लिख दीं। गोयल की लिखीं पुस्तकें पढ़ने के लिए आपको दर्पण का सहारा लेना पड़ेगा। उल्टे लिखे अक्षर दर्पण में सीधे दिखाई देंगे और आप आसानी से उसे पढ़ लेंगे।
पीयूष गोयल बताते हैं कि कुछ लोगों ने कहा कि आपकी लिखी किताबें पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत होगी। कुछ ऐसा करें कि दर्पण की जरूरत न पड़े। इस पर पीयूष गोयल ने सुई से मधुशाला लिख दी। 
हरिवंश राय बच्चन की पुस्तक ‘मधुशाला’ को सुई से मिरर इमेज में लिखने में करीब ढाई माह का समय लगा। गोयल की मानें तो यह सुई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सुई से लिखी गई है।

लेखक पीयूष गोयल

उल्‍टे अक्षरों से लिख गई भागवत गीता ( Bhagwat Gita )                        


भागवत गीता

आप इस भाषा को देखेंगे तो एकबारगी भौचक्के रह जायेंगे। आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण ( शीशे‌ ) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। इस मिरर इमेज किताब को पीयूष गोयल ने लिखा है। मिलनसार पीयूष गोयल मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।

सुई से लिखी मधुशाला ( Madhu shala)                                            

पीयूष गोयल ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि देखने वालों आँखें खुली रह जाएगी और न देखने वालों के लिए एक स्पर्श मात्र ही बहुत है। पीयूष गोयल ने पूछने पर बताया कि सुई से पुस्तक लिखने का विचार क्यों आया ? अक्सर मुझ से ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत पड़ती है। पढ़ना उसके साथ शीशा, आखिर बहुत सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'मधुशाला' को करीब 2 से ढाई महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे मोतियों जैसे पृष्ठों को गुंथा गया है, जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी 'मधुशाला' दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।

सुई से लिखी मधुशाला

( Madhu shala)


मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि ( Gitanjali )                           

मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि Gitanjali )
पीयूष गोयल ने एक और नया कारनामा कर दिखाया है उन्होंने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति 'गीतांजलि' को 'मेंहदी के कोन' से लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए।इसको लिखने में 17 कोन तथा दो नोट बुक प्रयोग में आई हैं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्त शती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैं। 'रामचरितमानस' ( दोहे, सोरठा और चौपाई ) को भी लिख चुके हैं। 

कील से लिखी 'पीयूष वाणी'                                                       

कील से लिखी 'पीयूष वाणी'
अब पीयूष गोयल ने अपनी ही लिखी पुस्तक 'पीयूष वाणी' को कील से ए-फोर साइज की एल्युमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि कील से क्यों लिखा है ? तो उन्होंने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'मधुशाला' को लिख चुके हैं। तो उन्हें विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्होंने ए-फोर साइज के एल्युमिनियम शीट पर भी लिख डाला।

कार्बन पेपर की मदद से लिखी 'पंचतंत्र' ( Carbon paper written 'Panchatantra' )

कार्बन पेपर की मदद से लिखी 'पंचतंत्र' ( Carbon paper written 'Panchatantra' )
गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णुशर्मा द्वारा लिखी 'पंचतंत्र' के सभी ( पाँच तंत्र, 41 कथा ) को लिखा है। पीयूष गोयल ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे।

जीवन परिचय                                                                      

पीयूष गोयल  का जन्म 10 फ़रवरी 1967 को माता रविकांता एवं डॉ. दवेंद्र कुमार गोयल के घर हुआ। पीयूष 2003 से कुछ न कुछ लिखते आ रहे हैं 
श्रीमदभगवदगीता (हिन्दी व अंग्रेज़ी), श्री दुर्गा सप्त सत्ती (संस्कृत), श्रीसांई सतचरित्र (हिन्दी व अंग्रेज़ी), श्री सुंदरकांड, चालीसा संग्रह, सुईं से मधुशाला, मेहंदी से गीतांजलि (रबींद्रनाथ टैगोर कृत), कील से "पीयूष वाणी" एवं कार्बन पेपर से "पंचतंत्र" (विष्णु शर्मा कृत)।
नर न निराश करो मन को 
नर न निराश करो मन को 
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रहकर कुछ नाम करो
इन लाइनों से प्रेरणा लेकर पले बढे है पीयूष गोयल पेशे से डिप्लोमा यांत्रिक इंजिनियर है और एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत हैं। इन सबके अलावा पीयूष गोयल दुनिया की पहली मिरर इमेज पुस्तक श्रीमदभागवत गीता के रचनाकार हैं। पीयूष गोयल ने सभी 18 अध्याय 700 श्लोक अनुवाद सहित हिंदी व अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लिखा है। पीयूष गोयल ने इसके अलावा दुनिया की पहली सुई से मधुशाला भी लिखी है। पीयूष गोयल की 3 पुस्तकें प्रकशित हो चुकी हैं। पीयूष गोयल संग्रह के भी शौक़ीन हैं, उनके पास प्रथम दिवश आवरण, पेन संग्रह, विश्व प्रसिद्ध लोगो के ऑटोग्राफ़ संग्रह भी हैं। इस के आलावा संस्कृत में श्री दुर्गा सत्सती, अवधीमें सुन्दरकाण्ड, हिंदी व अंग्रेज़ी में श्रीसाईं चरित्र भी लिख चुके हैं।

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Thursday, December 15, 2016

नये नोट और अफवाह

नये नोट और अफवाह

नये नोट और अफवाह

नोट बंदी के बाद नये नोट बाज़ार में आये और साथ में कोई सारी अफवाह भी उनके साथ आयी । जो सिर्फ लोगो को परेशान और बेवकूफ बनने के लिए फैलाई गई थी । भारत में जब भी कोई बदलाव होता है ,तो उससे जुड़ी अफवाह अवश्य फैलती है । जिस समय नोट बंदी हुई थी उसके दूसरे दिन ही एक अफवाह यह आयी की नमक महंगा होने वाला है, लोगो ने बिना सच्चाई जाने ही इस पर यकीन कर लिया और फिर क्या सब टूट पड़े दुकानों पर, बिना सच्चाई जाने ऐसा करना बेवकूफी है। तो आज की पोस्ट नये नोटो पर फैली अफवाह पर है , जिसमे नोट नोट से जुड़ी अफवाह की सचाई बताई जाएगी ।

नेनो टेक्नोलोजी GPS चिप :-

नोट बंदी के बाद सबसे पहले फैली ये अफवाह की नये 2000 के नोट में नेनो टेक्नोलोजी से बनी जीपीएस चिप लगी होगी जो नोट की loction treck करेगी । जिससे यह पता चलेगा की नोट अभी किस जगह पर है। ये तकनीक इसलिए बनाई गई थी ताकि नोट की जमाखोरी को रोका जा सके। पर ये सिर्फ अफवाह थी।  2000 के नोट में कही पर भी किसी भी प्रकार की नेनो जीपीएस चिप नही लगी है, ये बात भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा, और लोगो को नसीहत दी की ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दे.



असली नोट की पहचान एक सॉफ्टवेयर से :-
नये नोट को लेकर अफवाह का बाजार गर्म रहा , नोट पर वीडियो प्ले हो तो समझो नोट असली है, इस तरह के 
अफवाह फ़ैलाने वालों पर रखी जा रही है । नजर, और उसे सजा भी भी हो सकती है । भारत में 500 और 1000 
के पुराने नोट बंद होने के बाद 500 और 1000 के नये नोट आ चुके है लेकिन कुछ लोग अभी तक इन्हें देख भी 
नही पाए है,
इस बात का फायदा उठाते हुए कुछ शातिर अपराधी लोगों ने आम जनता को ठगना शुरू कर दिया है ऐसे लोग 
स्कैन और प्रिंट करते तैयार किये गए नकली नोटों को चलाने की कोशिश कर रहे है, इसी के साथ ही कई और 
भी अफवाह फ़ैल रही है। 
एक एप  modi keynote के बारे में है, अफवाहों में कहा जा रहा है, की इस mobile एप के जरिययह जांचकी जा सकती है की 500 और 1000 के नये नोट असली है या नकली, जबकि ये एप सिर्फ मनोरंजन के लिए है,
लेकिन बहुत से लोग इस एप को यह कहकर प्रचारित करने में लगे हुए है कि इसके जरिये नोट की पहचान की जा सकती है,  और बाजार में यह अफवाह वायरल हो चुकी है , 
इस एप को ऐसे डेवलप किया गया है, की स्कैन होने पर जैसे ही नये नोट के कलर और डिजाईन नजर आते है तो एप पर modi की विडियो प्ले होने लगती है,  मगर ये एप नोट को असली या नकली बताने में सक्षम  नही है, सरकार द्वारा गुजारिश है की इस एप को करंसी चेक करने के लिए इस्तेमाल न करें,

नोट का आग में न जलना :-

नये नोट बारे में बहुत से लोग ये अफवाह  भी फैला रहे है की नया नोट आग में नही जलता, पर ये सिर्फ अफवाह मात्र में ऐसा कोई कागज नही जो आग में न जले , तो ऐसी अफवाह से दूर रहे किसी के झाशे में  आ कर अपने कीमती नोट को न जलाये ,
आप इस विडियो में देख सकते है की 2000 का नया नोट आग में जल सकते है, विडियो देखने के लिए यहाँ click करे ,click hare


रेडियो एक्टिव स्याही :-

इन दिनों सोशल मीडिया पर नोटों में रेडियोएक्टिव स्याही के इस्तेमाल होने की बात कही जा रही है।
कई सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर और व्हाट्सएप पर इस तरह के मैसेज फॉरवर्ड किए जा रहे हैं जिनमें नोटों के पकड़े जाने की पीछे की वजह को उनमें इस्तेमाल स्याही को बताया जा रहा है। इन मैसेजेस में बाकायदा तर्क दिया गया है कि नोटों में प्रिंटिंग के समय फॉस्फोरस के रेडियोएक्टिव आइसोटोप का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें 15 प्रोटॉन और 17 न्यूट्रॉन होते हैं। यह रेडियोएक्टिव वार्निंग टेप की तरह प्रयोग होता है। इस तरह एक ही जगह पर अगर बहुत अधिक मात्रा में नोट होते हैं तो रेडियोएक्टिव मेटर इंडीकेटर से इसका पता चल जाता है। इसी से ऐसे लोग जांच समितियों के रडार की पकड़ में आ रहे हैं। 
गौरतलब है कि रेडियोएक्टिव पदार्थ से अल्फा, बीटा और गामा कण निकलते हैं, जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं इस वजह से त्वचा का कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। लेकिन इन मैसेज में साफ तौर पर कहा गया है कि यह ऐसा रेडियोएक्टिव पदार्थ है जिससे शरीर कोई नुकसान नहीं होता है। हालांकि रेडियो एक्टिव तत्व की एक विशेषता होती है कि वह एक निश्चित समय में अपनी मूल मात्रा का आधा रह जाता है इसे अर्धआयु  (T1/2) कहते हैं। हम एक बार फिर आपको बता देना चाहते हैं कि ये पूरी तरह से अफवाह है। ये हमारी जांच एजेंसियों की सतर्कता का नतीजा है जो इतनी बड़ी मात्रा में नोटों की तस्करी को रोका जा रहा है।




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Tuesday, November 22, 2016

नये नोट की पहचान नकली या असली

500 और 2000 के लिए नोट की पहचान 

नये नोट 500 और 2000 के

8 अक्तूबर  माननीय नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की , की मध्यरात्री से 500 और 1000 के नोट मान्य नही होंगे, ये घोषणा होते ही पुरे भारत में हडकंप मच गया । पर ये फेसला मोदी द्वारा बहुत सोच समझ के लिया गया थे, जिसके कई फायेदे है। नोट बदने का सबसे बड़ा करना था , जो देश में काला धन है उसे बाहर निकलना। 500 और 1000 की जगह नये नोट जारी की गये जिसमे 500 और 2000 के नोट शामिल है, भले ही नोट बंदी नकली नोट और काले धन  को रोकने के लिए किया गया था । 
नये नोट आने के बाद उनकी सही पहचान करना बहुत जरुरी है । कियोंकि नये नोट के बारे में शायद बहुत कम लोगो को पता है की नये नोट की पहचान कैसे की जाये । आज की पोस्ट इसी से सम्बन्धित है, की नये नोट 500 और 2000 की पहचान कैसे की जाये ।




भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बताया है कि 500 रुपये और 2000 रुपये के नए जारी किए गए नोट कैसे होंगे.

2000 नोट का size :-

देखा जाये तो 2000 के नोट का size काफी छोटा है । 2000 के नोट का आकार 66 mm x 166 mm है, जिससे एक फायदा तो ये होगा की ये पर्स में आसानी से आ जायेगा , पहले जो 500 और 1000 के उनका आकार बड़ा था जो आसानी से पर्स में नही आ पाते थे, तो नये नोट 2000 का सबसे अच्छा फायदा ये है की अब इसे आसानी से पर्स में डाल सकते है

रंग:-

नोट स्लेटी रंग का होगा. और नोट के पिछले हिस्से पर खास तौर से लालकिले की तस्वीर रहेगी.
हालांकि सरकार 2000 रुपये के नोट पहली बार जारी कर रही है. इसे भी महात्मा गांधी सिरीज के तहत रखा गया है.
2000 रुपये के नोट के पिछले हिस्से में मंगलयान की छवि रहेगी. 2000 रुपये के नोट गहरे गुलाबी रंग के होंगे.



  • नोट पर गुप्त रूप से '2000' छपा होगा
  • देवनागरी लिपि में '2000' लिखा रहेगा
  • नोट के केंद्र में महात्मा गांधी की तस्वीर
  • नोट के बाएं तरफ सूक्ष्म अक्षरों में RBI और 2000 लिखा होगा
  • बारीक सुरक्षा धागा जिस पर भारत, RBI और 2000 छपा रहेगा. तिरछा करके देखने पर रंग हरा से नीला होगा.
  • बायीं तरफ गवर्नर के दस्तखत, उनका वादानामा और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का प्रतीक.
  • नंबर पैनल पर नोट के नंबर छोटे से बड़े होते आकार में छपे होंगे. यह बायीं तरफ ऊपरी हिस्से में और दाहिनी तरफ निचले हिस्से में छपा होगा.
  • नोट के दाहिनी तरफ अशोक स्तंभ का प्रतीक.
नोट के पिछले तरफ
  • नोट के मुद्रण का वर्ष
  • स्वच्छ भारत का लोगो इसके नारे के साथ.
  • अलग-अलग भाषाओं में दो हजार रुपये
  • मंगलयान की तस्वीर

नये नोट आने के बाद ये बात भी सामने आई थी की 2000 के नोट में अक खास किस्म की चिप लगी होगी , पर नोट में किसी भी प्रकार की कोई भी चिप नही लगी है ये बस अक अफवाह थी,

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