Thursday, December 15, 2016

नये नोट और अफवाह

नये नोट और अफवाह

नये नोट और अफवाह

नोट बंदी के बाद नये नोट बाज़ार में आये और साथ में कोई सारी अफवाह भी उनके साथ आयी । जो सिर्फ लोगो को परेशान और बेवकूफ बनने के लिए फैलाई गई थी । भारत में जब भी कोई बदलाव होता है ,तो उससे जुड़ी अफवाह अवश्य फैलती है । जिस समय नोट बंदी हुई थी उसके दूसरे दिन ही एक अफवाह यह आयी की नमक महंगा होने वाला है, लोगो ने बिना सच्चाई जाने ही इस पर यकीन कर लिया और फिर क्या सब टूट पड़े दुकानों पर, बिना सच्चाई जाने ऐसा करना बेवकूफी है। तो आज की पोस्ट नये नोटो पर फैली अफवाह पर है , जिसमे नोट नोट से जुड़ी अफवाह की सचाई बताई जाएगी ।

नेनो टेक्नोलोजी GPS चिप :-

नोट बंदी के बाद सबसे पहले फैली ये अफवाह की नये 2000 के नोट में नेनो टेक्नोलोजी से बनी जीपीएस चिप लगी होगी जो नोट की loction treck करेगी । जिससे यह पता चलेगा की नोट अभी किस जगह पर है। ये तकनीक इसलिए बनाई गई थी ताकि नोट की जमाखोरी को रोका जा सके। पर ये सिर्फ अफवाह थी।  2000 के नोट में कही पर भी किसी भी प्रकार की नेनो जीपीएस चिप नही लगी है, ये बात भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा, और लोगो को नसीहत दी की ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान न दे.



असली नोट की पहचान एक सॉफ्टवेयर से :-
नये नोट को लेकर अफवाह का बाजार गर्म रहा , नोट पर वीडियो प्ले हो तो समझो नोट असली है, इस तरह के 
अफवाह फ़ैलाने वालों पर रखी जा रही है । नजर, और उसे सजा भी भी हो सकती है । भारत में 500 और 1000 
के पुराने नोट बंद होने के बाद 500 और 1000 के नये नोट आ चुके है लेकिन कुछ लोग अभी तक इन्हें देख भी 
नही पाए है,
इस बात का फायदा उठाते हुए कुछ शातिर अपराधी लोगों ने आम जनता को ठगना शुरू कर दिया है ऐसे लोग 
स्कैन और प्रिंट करते तैयार किये गए नकली नोटों को चलाने की कोशिश कर रहे है, इसी के साथ ही कई और 
भी अफवाह फ़ैल रही है। 
एक एप  modi keynote के बारे में है, अफवाहों में कहा जा रहा है, की इस mobile एप के जरिययह जांचकी जा सकती है की 500 और 1000 के नये नोट असली है या नकली, जबकि ये एप सिर्फ मनोरंजन के लिए है,
लेकिन बहुत से लोग इस एप को यह कहकर प्रचारित करने में लगे हुए है कि इसके जरिये नोट की पहचान की जा सकती है,  और बाजार में यह अफवाह वायरल हो चुकी है , 
इस एप को ऐसे डेवलप किया गया है, की स्कैन होने पर जैसे ही नये नोट के कलर और डिजाईन नजर आते है तो एप पर modi की विडियो प्ले होने लगती है,  मगर ये एप नोट को असली या नकली बताने में सक्षम  नही है, सरकार द्वारा गुजारिश है की इस एप को करंसी चेक करने के लिए इस्तेमाल न करें,

नोट का आग में न जलना :-

नये नोट बारे में बहुत से लोग ये अफवाह  भी फैला रहे है की नया नोट आग में नही जलता, पर ये सिर्फ अफवाह मात्र में ऐसा कोई कागज नही जो आग में न जले , तो ऐसी अफवाह से दूर रहे किसी के झाशे में  आ कर अपने कीमती नोट को न जलाये ,
आप इस विडियो में देख सकते है की 2000 का नया नोट आग में जल सकते है, विडियो देखने के लिए यहाँ click करे ,click hare


रेडियो एक्टिव स्याही :-

इन दिनों सोशल मीडिया पर नोटों में रेडियोएक्टिव स्याही के इस्तेमाल होने की बात कही जा रही है।
कई सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर और व्हाट्सएप पर इस तरह के मैसेज फॉरवर्ड किए जा रहे हैं जिनमें नोटों के पकड़े जाने की पीछे की वजह को उनमें इस्तेमाल स्याही को बताया जा रहा है। इन मैसेजेस में बाकायदा तर्क दिया गया है कि नोटों में प्रिंटिंग के समय फॉस्फोरस के रेडियोएक्टिव आइसोटोप का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें 15 प्रोटॉन और 17 न्यूट्रॉन होते हैं। यह रेडियोएक्टिव वार्निंग टेप की तरह प्रयोग होता है। इस तरह एक ही जगह पर अगर बहुत अधिक मात्रा में नोट होते हैं तो रेडियोएक्टिव मेटर इंडीकेटर से इसका पता चल जाता है। इसी से ऐसे लोग जांच समितियों के रडार की पकड़ में आ रहे हैं। 
गौरतलब है कि रेडियोएक्टिव पदार्थ से अल्फा, बीटा और गामा कण निकलते हैं, जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक होते हैं इस वजह से त्वचा का कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। लेकिन इन मैसेज में साफ तौर पर कहा गया है कि यह ऐसा रेडियोएक्टिव पदार्थ है जिससे शरीर कोई नुकसान नहीं होता है। हालांकि रेडियो एक्टिव तत्व की एक विशेषता होती है कि वह एक निश्चित समय में अपनी मूल मात्रा का आधा रह जाता है इसे अर्धआयु  (T1/2) कहते हैं। हम एक बार फिर आपको बता देना चाहते हैं कि ये पूरी तरह से अफवाह है। ये हमारी जांच एजेंसियों की सतर्कता का नतीजा है जो इतनी बड़ी मात्रा में नोटों की तस्करी को रोका जा रहा है।




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Tuesday, November 22, 2016

नये नोट की पहचान नकली या असली

500 और 2000 के लिए नोट की पहचान 

नये नोट 500 और 2000 के

8 अक्तूबर  माननीय नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की , की मध्यरात्री से 500 और 1000 के नोट मान्य नही होंगे, ये घोषणा होते ही पुरे भारत में हडकंप मच गया । पर ये फेसला मोदी द्वारा बहुत सोच समझ के लिया गया थे, जिसके कई फायेदे है। नोट बदने का सबसे बड़ा करना था , जो देश में काला धन है उसे बाहर निकलना। 500 और 1000 की जगह नये नोट जारी की गये जिसमे 500 और 2000 के नोट शामिल है, भले ही नोट बंदी नकली नोट और काले धन  को रोकने के लिए किया गया था । 
नये नोट आने के बाद उनकी सही पहचान करना बहुत जरुरी है । कियोंकि नये नोट के बारे में शायद बहुत कम लोगो को पता है की नये नोट की पहचान कैसे की जाये । आज की पोस्ट इसी से सम्बन्धित है, की नये नोट 500 और 2000 की पहचान कैसे की जाये ।




भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बताया है कि 500 रुपये और 2000 रुपये के नए जारी किए गए नोट कैसे होंगे.

2000 नोट का size :-

देखा जाये तो 2000 के नोट का size काफी छोटा है । 2000 के नोट का आकार 66 mm x 166 mm है, जिससे एक फायदा तो ये होगा की ये पर्स में आसानी से आ जायेगा , पहले जो 500 और 1000 के उनका आकार बड़ा था जो आसानी से पर्स में नही आ पाते थे, तो नये नोट 2000 का सबसे अच्छा फायदा ये है की अब इसे आसानी से पर्स में डाल सकते है

रंग:-

नोट स्लेटी रंग का होगा. और नोट के पिछले हिस्से पर खास तौर से लालकिले की तस्वीर रहेगी.
हालांकि सरकार 2000 रुपये के नोट पहली बार जारी कर रही है. इसे भी महात्मा गांधी सिरीज के तहत रखा गया है.
2000 रुपये के नोट के पिछले हिस्से में मंगलयान की छवि रहेगी. 2000 रुपये के नोट गहरे गुलाबी रंग के होंगे.



  • नोट पर गुप्त रूप से '2000' छपा होगा
  • देवनागरी लिपि में '2000' लिखा रहेगा
  • नोट के केंद्र में महात्मा गांधी की तस्वीर
  • नोट के बाएं तरफ सूक्ष्म अक्षरों में RBI और 2000 लिखा होगा
  • बारीक सुरक्षा धागा जिस पर भारत, RBI और 2000 छपा रहेगा. तिरछा करके देखने पर रंग हरा से नीला होगा.
  • बायीं तरफ गवर्नर के दस्तखत, उनका वादानामा और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का प्रतीक.
  • नंबर पैनल पर नोट के नंबर छोटे से बड़े होते आकार में छपे होंगे. यह बायीं तरफ ऊपरी हिस्से में और दाहिनी तरफ निचले हिस्से में छपा होगा.
  • नोट के दाहिनी तरफ अशोक स्तंभ का प्रतीक.
नोट के पिछले तरफ
  • नोट के मुद्रण का वर्ष
  • स्वच्छ भारत का लोगो इसके नारे के साथ.
  • अलग-अलग भाषाओं में दो हजार रुपये
  • मंगलयान की तस्वीर

नये नोट आने के बाद ये बात भी सामने आई थी की 2000 के नोट में अक खास किस्म की चिप लगी होगी , पर नोट में किसी भी प्रकार की कोई भी चिप नही लगी है ये बस अक अफवाह थी,

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Sunday, November 13, 2016

14 नवम्बर बाल दिवस (नेहरु जी )

बाल दिवस(नेहरु जी)

बाल दिवस मुख्य रूप से नेहरु जी के जन्म दिन के उपलक्ष में मनाया जाता है, उसका कारण यह है की नेहरु जी बच्चो बहुत प्यार करते थे, इस लिए नेहरु जी के जयंती को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता l नेहरु जी का पूरा नाम प. जवाहर लाल नेहरु है. नेहरु जी को बच्चे प्यार से चाचा नेहरु बोला करते थे, तो चलो उनके जीवन के बारे में जानते है l

जन्म

नेहरु जी का जन्म इलाहाबाद में 14 नवम्बर 1889 को हुआ l नेहरु कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे , जो विद्वत्ता और अपनी प्रशासनिक क्षमताओं के लिए विख्यात थे और जो 18 वींशताव्दी के आरंभ में इलाहबाद आ गये थे l नेहरु जी के पिता का नाम पं. मोतीलाल नेहरु और माता का नाम श्रीमती स्वरूप रानी था l वे अपने माता पिता के अकलोते पित्र थे उसके अलावा उनकी दो बहने थी l और नेहरु जी सबसे बड़े थे l उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं l

शिक्षा

नेहरु जी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई l जैसे की नेहरु जी धनी परिवार से थे तो उनके लिए किसी चीज की कोई कमी नही थी l 14 वर्ष तक नेहरु जी की शिक्षा उनके घर पर कई अंग्रेजी अध्यापकों और शिक्षकों के द्वारा हुई l इनमें से सिर्फ एक, फर्डिनैंड ब्रुक्स का, जो आधे आयरिश और आधे बेल्जियन अध्यात्मज्ञानी थे, उन का प्रभाव पड़ा l नहेरु जी के एक ऐसे शिक्षक थे जो उन्हें हिंदी और संस्कृत पढ़ाते थे, 15 वर्ष की उम्र में 1905 में नेहरु को अक अग्रणी अंग्रेजी विद्यालय हैरो स्कूल में भेजा गया , जो इंग्लेंड में है l वह उन्होंने 2 वर्ष पढाई की, और उसके बाद वह केंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गये, प्रकृति विज्ञान में स्नातक उपाधि उन्होंने इसी स्कूल से प्राप्त की, उनके विषय रसायनशास्त्र, भूगर्भ विधा और वनस्पति शास्त्र थे l उसके बाद लंदनके इनर टेंपल में दो वर्ष बिताकर उन्होंने वकालत की पढाई शुरु की l 

परिवार 

अपनी वकालत की पढाई पूरी करने के बाद वे भारत लौटे और चार साल बाद मार्च 1916 में नेहरु जी का विवाह कमला कौल के साथ हुआ, जो दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थी l 1917 में उनकी एक पुत्री हुई जिसका नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी पड़ा, जो उनकी इकलोती सन्तान थी,  इंदिरा प्रियदर्शिनी के विवाह के बाद नाम इंदिरा गाँधी हुआ , जो भारत की प्रधानमंत्री बनीं l 

वकील के रूप में 

1912 ई. में वे बैरिस्टर बने और उसी वर्ष भारत लौटकर उन्होंने इलाहाबाद में वकालत प्रारम्भ की। वकालत में उनकी विशेष रुचि न थी और शीघ्र ही वे भारतीय राजनीति में भाग लेने लगे। 1912 ई. में उन्होंने बाँकीपुर (बिहार) में होने वाले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। भारत लौटने के बाद नेहरू ने पहले वकील के रूप में स्थापित होने का प्रयास किया लेकिन अपने पिता के विपरीत उनकी इस पेशे में कोई ख़ास रुची नहीं थी और उन्हें वकालत और वकीलों का साथ, दोनों ही नापसंद थे। उस समय वह अपनी पीढ़ी के कई अन्य लोगों की भांति भीतर से एक ऐसे राष्ट्रवादी थे l 

राजनीत में कदम 

भारत लौटने के बाद नेहरू ने पहले वकील के रूप में स्थापित होने का प्रयास किया लेकिन अपने पिता के विपरीत उनकी इस पेशे में कोई ख़ास रुची नहीं थी और उन्हें वकालत और वकीलों का साथ, दोनों ही नापसंद थे। उस समय वह अपनी पीढ़ी के कई अन्य लोगों की भांति भीतर से एक ऐसे राष्ट्रवादी थे, जो अपने देश की आज़ादी के लिए बेताब हो, लेकिन अपने अधिकांश समकालीनों की तरह उसे हासिल करने की ठोस योजनाएं न बना पाया हो।
1916 ई. के लखनऊ अधिवेशन में वे सर्वप्रथम महात्मा गाँधी के सम्पर्क में आये। गांधी उनसे 20 साल बड़े थे। दोनों में से किसी ने भी आरंभ में एक-दूसरे को बहुत प्रभावित नहीं किया। बहरहाल, 1929 में कांग्रेस के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन का अध्यक्ष चुने जाने तक नेहरू भारतीय राजनीति में अग्रणी भूमिका में नहीं आ पाए थे। इस अधिवेशन में भारत के राजनीतिक लक्ष्य के रूप में संपूर्ण स्वराज्य की घोषणा की गई। उससे पहले मुख्य लक्ष्य औपनिवेशिक स्थिति की माँग था। नेहरू जी के शब्दों में:-

कुटिलता की नीति अन्त में चलकर फ़ायदेमन्द नहीं होती। हो सकता है कि अस्थायी तौर पर इससे कुछ फ़ायदा हो जाए। अगर हम इस देश की ग़रीबी को दूर करेंगे, तो क़ानूनों से नहीं, शोरगुल मचाके नहीं, शिकायत करके नहीं, बल्कि मेहनत करके। एक-एक आदमी बूढ़ा और छोटा, मर्द , औरत और बच्चा मेहनत करेगा। हमारे सामने आराम नहीं है।
नेहरू की आत्मकथा से भारतीय राजनीति में उनकी गहरी रुचि का पता चलता है। उन्हीं दिनों अपने पिता को लिखे गए पत्रों से भारत की स्वतंत्रता में उन दोनों की समान रुचि दिखाई देती है। लेकिन गांधी से मुलाक़ात होने तक पिता और पुत्र में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए निश्चित योजनाओं का विकास नहीं हुआ था। गांधी ने उन्हें राजनीति में अपना अनुयायी बना लिया। गांधी द्वारा कर्म पर बल दिए जाने के गुण से वह दोनों प्रभावित हुए। महात्मा गांधी का तर्क था कि ग़लती की सिर्फ़ निंदा ही नहीं, बल्कि प्रतिरोध भी किया जाना चाहिए। इससे पहले नेहरू और उनके पिता समकालीन भारतीय राजनीतिज्ञों का तिरस्कार करते थे, जिनका राष्ट्रवाद, कुछ अपवादों को छोड़कर लंबे भाषणों और प्रस्तावों तक सीमित था। गांधी द्वारा ग्रेट ब्रिटेन के ख़िलाफ़ बिना भय या घृणा के लड़ने पर ज़ोर देने से भी जवाहरलाल बहुत प्रभावित हुए।



जेल की यात्रा

कांग्रेस पार्टी के साथ नेहरू का जुड़ाव 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के तुरंत बाद आरंभ हुआ। इस काल में राष्ट्रवादी गतिविधियों की लहर ज़ोरों पर थी और अप्रैल 1919 को अमृतसर के नरसंहार के रूप में सरकारी दमन खुलकर सामने आया; स्थानीय ब्रिटिश सेना कमांडर ने अपनी टुकड़ियों को निहत्थे भारतीयों की एक सभा पर गोली चलाने का हुक्म दिया, जिसमें 379 लोग मारे गये और कम से कम 1,200 घायल हुए। नेहरू जी के शब्दों में:-
भारत की सेवा का अर्थ, करोड़ों पीड़ितों की सेवा है। इसका अर्थ दरिद्रता और अज्ञान, और अवसर की विषमता का अन्त करना है। हमारी पीढ़ी के सबसे बड़े आदमी की यह आकांक्षा रही है-कि प्रत्येक आँख के प्रत्येक आँसू को पोंछ दिया जाए। ऐसा करना हमारी शक्ति से बाहर हो सकता है, लेकिन जब तक आँसू हैं और पीड़ा है, तब तक हमारा काम पूरा नहीं होगा।


प्रधानमंत्री के रूप में उपलब्धियाँ

1929 में जब लाहौर अधिवेशन में गांधी ने नेहरू को अध्यक्ष पद के लिए चुना था, तब से 35 वर्षों तक- 1964 में प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए मृत्यु तक, 1962 में चीन से हारने के बावजूद, नेहरू अपने देशवासियों के आदर्श बने रहे। राजनीति के प्रति उनका धर्मनिरपेक्ष रवैया गांधी के धार्मिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से भिन्न था। गांधी के विचारों ने उनके जीवनकाल में भारतीय राजनीति को भ्रामक रूप से एक धार्मिक स्वरूप दे दिया था। गांधी धार्मिक रुढ़िवादी प्रतीत होते थे, किन्तु वस्तुतः वह सामाजिक उदारवादी थे, जो हिन्दू धर्म को धर्मनिरपेक्ष बनाने की चेष्ठा कर रहे थे। गांधी और नेहरू के बीच असली विरोध धर्म के प्रति उनके रवैये के कारण नहीं, बल्कि सभ्यता के प्रति रवैये के कारण था। जहाँ नेहरु लगातार आधुनिक संदर्भ में बात करते थे। वहीं गांधी प्राचीन भारत के गौरव पर बल देते थे। 

मृत्यु

चीन  के साथ संघर्ष के कुछ ही समय बाद नेहरू के स्वास्थ्य में गिरावट के लक्षण दिखाई देने लगे। उन्हें 1963 में दिल का हल्का दौरा पड़ा, जनवरी 1964 में उन्हें और दुर्बल बना देने वाला दौरा पड़ा। कुछ ही महीनों के बाद तीसरे दौरे में 27 मई 1964 में उनकी मृत्यु हो गई।



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